पर्यावरण प्रेमी श्री हिम्मताराम जी ने की महामहिम राष्ट्रपति जी से मुलाक़ात

साल 1975 में 19 साल की उम्र में दादी के कहने पर पीपल का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का बीज रोपने वाले नागौर के हिम्मताराम आज 69 साल की उम्र में भी जीव रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का काम कर रहे हैं. अब राष्ट्रपति ने उन्हें बुलाया और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की.

नागौर में सुखवासी गांव के हिम्मताराम भाम्भू ने 3 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति भवन में पर्यावरण संरक्षण, जीव रक्षा और जनसंख्या नियंत्रण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार बताए. वे राजस्थान के एकमात्र व्यक्ति हैं. जिन्हें इस दिन राष्ट्रपति भवन का बुलावा मिला था.

हिम्मताराम जी भाम्भू ने 1975 में 19 साल की उम्र में अपनी दादी के कहने पर पैतृक गांव सुखवासी में पीपल का पौधा रोपकर उसकी नियमित देखभाल की तो उनके मन में पर्यावरण संरक्षण और जीव रक्षा का बीज अंकुरित हुआ. उनके हाथ से लगा पीपल का पौधा आज विशाल पेड़ बन चुका है. इसके साथ ही मन में फूटा पर्यावरण संरक्षण का बीज भी आज विशाल वट वृक्ष बन चुका है.

उन्होंने अपनी खुद की जमीन पर 6 हैक्टेयर में 11 हजार पौधे लगाकर हरिमा गांव के धोरों में वन भी तैयार किया हुआ है. जहां हजारों पक्षियों का बसेरा है. इसे पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र नाम दिया गया है. हिम्मताराम को पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन से बुलावा आया तो उन्होंने 3 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और पर्यावरण संरक्षण व जीव रक्षा के विषय पर भविष्य की रूपरेखा बताई. हिम्मताराम भाम्भू का कहना है, कि अब उनका लक्ष्य 2030 तक 2 लाख पौधे लगाकर उन्हें पेड़ बनाना है. साथ ही देश को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए भी अभियान चलाना है.

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